उत्तराखंड में बादलों का प्रकोप: 15 साल का रिकॉर्ड टूटा, बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें

उत्तराखंड में बादलों का प्रकोप: 15 साल का रिकॉर्ड टूटा, बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें

लगभग तीन महीने से ज्यादा समय तक सक्रिय रहने के बाद अब उत्तराखंड में मानसून की विदाई का समय आ गया है। मौसम विभाग के अनुसार, मानसून हरिद्वार और आसपास के इलाकों से अलविदा कह चुका है और अगले दो-तीन दिनों में पूरे प्रदेश से इसके समाप्त होने की संभावना जताई गई है।

इस बार मानसून ने पूरे राज्य में तबाही मचाई और बीते 15 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। राजधानी देहरादून में तो बारिश ने 101 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ डाला। 21 जून को दस्तक देने के बाद से मानसून ने उत्तराखंड को जमकर भिगोया।

2010 के बाद सबसे ज्यादा बारिश

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस बार पूरे प्रदेश में औसत से 23% ज्यादा यानी 1411.5 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य आंकड़ा 1147.4 मिमी है। 2010 के बाद यह अब तक की सबसे ज्यादा बारिश है। उस साल 1680 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी।

पिछले साल की तुलना में भी इस बार बारिश कहीं ज्यादा रही। 2022 में मानसून के दौरान 9% ज्यादा 1273 मिमी बारिश हुई थी, जबकि इस बार यह आंकड़ा उससे भी आगे निकल गया।

मानसून से हुई भारी तबाही

बारिश ने जहां रिकॉर्ड तोड़ा, वहीं भारी नुकसान भी पहुंचाया। राज्य के विभिन्न हिस्सों में भूस्खलन, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण 260 से ज्यादा लोगों की जान गई, जबकि संपत्ति को भी भारी क्षति हुई।

मानसून विदाई की रेखा

मौसम विभाग के निदेशक डॉ. तोमर के अनुसार, 24 सितंबर को मानसून की वापसी की रेखा रामपुर, बुलंदशहर, हरिद्वार, मुरादाबाद और एटा से गुजर रही थी। अगले कुछ दिनों में पूरे प्रदेश से मानसून की विदाई की संभावना है, जिसके बाद मौसम के साफ होने और राहत मिलने की उम्मीद है।

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